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Friday, August 20, 2021

तालिबान को लेकर मक्कारों का घड़ियाली रोना और अफगानी औरतों की फिक्र*


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*आप बीस वर्ष पहले के वह हालात याद कीजिये जब अमेरिका मरखने सांड की तरह गुस्से में भरा हुआ अफगानिस्तान पर चढ़ दौड़ा था, और तालिबान को नेस्त व नाबूद करने के नाम पर क्लिस्टर बम बरसाए थे, जिसके नतीजे में हज़ारों आम अफगानी बच्चे महिलाएं बूज़ुर्ग मारे गए, और कितने अपंग हुए, और लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा*।

*ग्वांतानामोबे और बगराम एयरबेस की जेल में अमेरिकन फौजी मुस्लिम कैदियों पर थूकते, पेशाब करते, नँगा करके लाइन में खड़ा कर देते, गुप्तांगों पर सिगरेट से दागते, नँगा करके कुत्तों को छोड़ते, घण्टो एक छोटे से पिंजरे में एक पोजीशन पर पड़ा रहने देते, ऐसे फौजी जिन्होंने किसी को शूट नही किया उन्हें कहा गया कि कैदियों पर हाथ साफ कर लो, क्रूरता की ऐसी मिसाल कायम की गई कि हिटलर शर्मा जाए*। 

*लेकिन अमेरिका बहादुर के काले कारनामो पर किसी मानवता वादी ने वह हाय तौबा नही मचाई जो तालिबान के आने पर हो रही है, ऐसी परिस्थितियों में जब सत्ता परिवर्तन होती है तो बहुत ज़्यादा खून खराबे की उम्मीद होती है, लेकिन तालिबान को बर्बर कहने वाले लोग हैरत में हैं कि लूट मार क़त्ल व गारतगिरी क्यों नही हुई? इतनी खामोशी से सत्ता हस्तांतरण हो रहा है इसपर तो मानवता वादियों को खुशियां मनानी चाहिए*।

*आपको वह ज़ुल्म याद होने चाहिए जो अमेरिका और अफगान फौज ने अपनी बरतरी के दिनों में तालिबान पर किये थे, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब्दुर रशीद दोस्तम ने दशते लैला में 1500 तालिबान कैदियों को तीन रोज़ तक भूखे प्यासे कंटेनरों में बंद रेगिस्तान में डाले रखा, जिससे बहुत सौ की दम घुटने से मौत हो गई, बहुत सौ ने भूख में अपने हाथों पर काट लिया, इसके बाद गोलियां बरसा कर उन सबकी* *सामूहिक हत्या कर दी गई, और गढ़ा खोदकर इज्तिमाई क़ब्रो में दफन कर दिया गया। ज़ुल्म व सितम की ये कहानी बहुत तवील है*।

*तालिबान के आधिकारिक बयानों को देखिए, उनका कहना है कि हमसे कुछ गलतियां हुई थीं, लड़कियों को तालीम का अधिकार है, पर्दे की बुर्के से अलग भी कई शक्ल हैं। तालिबान ने अपने लड़ाकों को हिदायत की है, बुनियादी ढांचा अफगान अवाम की मिल्कियत है, उसकी सुरक्षा की जाए, स्कूल कॉलेज अस्पताल और लोगो के घरों की हिफाज़त की जाए। सभी सियासतदानों को आम माफी का एलान हुआ। क्या आपको नही लगता कि तालिबान ने अपने सियासी और फौजी मुख़ालिफीन को माफ करके दुनिया को एक पैगाम दिया है* ?

*आइये अब कुछ बात अफगानी औरतों की फिक्रमंदी की*
*आज अफगान औरतों की फिक्र वो लोग कर रहे है और घड़ियाली आँसू बहा रहे है जो रेप के मामले में दुनियाँ में दूसरे नंम्बर पर है , जहाँ रेप आरोपी के समर्थन में झंडा यात्रा निकलती है, जहाँ मासूम बच्चियों को रेप कर जिंदा जला दिया जाता है , जहाँ दहेज के नाम पर हजारों बेटियाँ मार दी जाती है , जहाँ लड़की को जन्म से पहले ही भ्रूण हत्या कर दी जाती है । जहाँ मुस्लिम औरतों को कब्र से निकालकर बलात्कार की धमकी दी जाती हो, जहाँ मुस्लिम लड़कियों से शादी करने पर खचलेआम ईनाम का ऐलान होता हो, जहाँ सोसल मीडिया पर मुस्लिम लड़कियों की बोली लगती हो*,

*इसलिये इन मानवता वादियों से गुजारिश है कि अगर थोड़ी भी आँखों में शर्म है तो अपने देश की बात करों तालिबान का रोना छोड़ो वो सक्षम है अपने आप में , यहाँ के हालात पर बोलने में मुँह में लकवा मार जाता है जब एक मासूम को सिर्फ इस लिये बेदर्दी से पीटा जाता है कि वो मन्दिर में पानी पीने चला गया था*।
*अभी चार दिन पहले दिल्ली में खुले आम एक संम्प्रदाय को काटने मारने के नारे लगते है तो वही कानपुर में एक ई रिक्शा चालक को बजरंग दल आतंकवादी संगठन के लोग उसकी बच्ची के सामने पीटते है* ।
*लिखने को बहुत कुछ है मेरे पास लेकिन आज के लिये इतना काफी है क्यों कि मुझे मालुम है आपका हाजमा खराब हो जायेगा* …

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الحمدللہ

اگر آپ کو پیاس لگے اور دس منٹ کے اندر اندر تازہ یا فریج کے پانی کا گلاس آپ کو مل سکتا ہے تو پھر سب سے پہلے الحمد للہ کہیں۔ ۔ ۔ الحمدللہ کہیں...